ई कैसी बैठक हो रही भाई
अड़ीबाजी कभी बनारस के अस्सी और वहाँ के कई ऐसे खलिहर लोगों की काशिका कही गयी मज़ेदार कहानियां हुआ करती हैं जिन्हें वहाँ कि मस्ती में चाय कि चुस्कियों के साथ सुनने में मज़ा आये और हटने का दिल ना कहे … पर इन दिनों खबरिया टीवी चैनलों में आपको हमें बड़े खलिहर मिल ही जाते हैं बैठक करते हुये… मैं जब उन लोगों को सुनता हूं तो रुककर देख लेता हूं कि ई कैसी बैठक हो रही है भाई … जहाँ कुछ खाली पत्रकार और खाली टाइप के राजनीतिक चेला टाइप के लोग मिल जाते हैं. जिनके वाक्य माशा अल्ला बड़े गजब के होते हैं. लेकिन असलियत ये कि वहाँ बातें तो हमारी आपकी होती हैं लेकिन उन बातों का असर होता कही दिखता नहीं फिलहाल अभी कही निकलना है लौटकर कुछ जरुर निपटेंगे ....
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